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God is kabir

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सर्व सृष्टि रचनहार कबीर परमात्मा आदरणीय गरीब दास जी को कबीर परमात्मा मिले थे, उन्होंने अपनी वाणीयों में अनेकों प्रमाण दिए हैं कि कबीर जी ही पूर्ण परमात्मा हैं, जिसने सर्व सृष्टि की रचना की "गरीब, जल थल पृथ्वी गगन में बाहर भीतर एक। पूर्ण ब्रह्म कबीर है, अविगत पुरुष अलेख।" अधिक जानकारी के लिए देखें साधना टीवी शाम 7:30 बजे          गरीब, बारद ढुरि कबीर कै                भक्ति हेत के काज। जब कबीर जी काशी में लहरतारा तालाब में कमल के फूल पर शिशु रूप में प्रकट होकर लीला करने आए हुए थे। उसी समय एक रामानन्द जी पंडित थे जो प्रसिद्ध आचार्य माने जाते थे। उनको कबीर परमेश्वर जी ने अपने सत्यलोक के दर्शन कराए, अपना परिचय कराया। फिर वापिस शरीर में लाकर छोड़ा। उसके पश्चात् स्वामी रामानन्द जी ने कहा                         स्वामी रामानन्द जी ने कहा है कि हे कबीर जी! आप ऊपर सतलोक में भी हैं, आप यहाँ हमारे पास भी विद्यमान हैं। आप दोनों स्थानों पर लीला कर रहे हैं।...

सन्तों की शिक्षा

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सत भक्ति Link this is video https://youtu.be/qakP9CKotik                                                   जिस भी देव के गुणों से प्रभावित होकर उससे लाभ लेने के लिए आप प्रयत्नशील है उससे लाभ की प्राप्ति उसकी मूर्ति से नहीं हो सकती उसकी विधि शास्त्रों में वर्णित है वह अपनाएं तथा मजदूरी यानी साधना करके भक्ति धन संग्रह करें फिर वृक्ष की शाखा रूपी देव आप जी को मन वांछित फल आपके भक्ति कर्म के आधार से देंगे https://youtu.be/BvyfUYtth9Q www.jagatgururampalji.org Sant Shiromani Ravidas Jayanti 2019:  अपने आध्यात्मिक व सामाजिक संदेशों से समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने वाले महान समाज सुधारक, परम ज्ञानी संत शिरोमणि रविदास की आज जयंती है। गुरु रविदास को महान संत, दार्शनिक, समाज सुधारक और भक्त माना जाता है।  गुरु रविदास का जन्म काशी में माघ पूर्णिमा के दिन संवत 1433 को हुआ था। इस वर्ष यानी 2019 में ...
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सन्तों की शिक्षा भगवान _मत _भूलो क्योंकि मनुष्य जन्म बहुत ही दुर्लभ है बहुत जन्मों के बाद मनुष्य जन्म  मिलता है और मनुष्य जन्म का मुख्य उद्देश्य जन्म मरण के बंधन से छुटकारा पाने के लिए होता है #पूर्ण_परमात्मा_आयु_बढ़ा_सकता_है_और_कोई_भी_रोग_को_नष्ट_कर_सकता_है। ऋग्वेद मण्डल 10 सुक्त 161 मंत्र 2, 5, सुक्त 162 मंत्र 5, सुक्त 163 मंत्र 1 - 3 पूर्ण परमात्मा सब कुछ कर सकते हैं आप भी देखिये ये जीता जागता उदाहरण #कैंसर जैसी लाइलाज बिमारी केवल #संत_रामपाल_जी_महाराज_जी से नाम दीक्षा लेकर #शास्त्र_अनुकूल_साधना करने से ही जड़ से समाप्त हो गई              #आध्यात्मिक_गुरु_संतरामपालजी_महाराज_द्वारा_विश्वपल  किसी सोच विचार और बिना किसी आधार के किसी भी भगवान या देवता का पालन करना और पूजा करना है। उस पर सबसे सच्चे सबूत आधारित (सभी धर्मों के सभी शास्त्र ही सबूत और आधार होते है) पूजा को स्वीकार नहीं करते हैं, इसे #अंधविश्वास के रूप में भी माना जाता है। पूजा जो शास्त्रों के आदेशों का विरोध करती है वह हानिकारक है,  कोई भी सबसे सच्चे सबूत...

सन्तों की शिक्षा

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                              सन्तों की शिक्षा #परमेश्वर_के_श्रेष्ठ_तथा_उच्च_कोटी_के_विचार #चरित्रवान_की_कथा एक #शुकदेव_ऋषि थे। वे श्री #वेदव्यास_के_पुत्र थे। एक दिन वे #दीक्षा_लेने_के_उद्देश्य_से_राजा_जनक_जी के पास मिथिला नगरी में गए। राजा जनक ने कहा कि शुकदेव कल सुबह नाम दूँगा। उनके ठहरने की व्यवस्था अलग भवन में कर दी। एक #सुंदर_युवती को #ऋषि जी की सेवा में परीक्षा लेने के उद्देश्य से भेजा। युवती शुकदेव जी के पलंग पर पैरों की और बैठ गई। ऋषि जी ने पैर सिकोड़कर और मोड़ लिए। युवती ऋषि जी की ओर निकट हुई तो उठकर खड़े हो गए। कहा कि हे बहन! आप अच्छे घर की #बेटी दिखाई देती हो। कृपा कमरे से बाहर जाऐं, नहीं तो मैं चला जाता हूँ। लड़की चली गई। राजा जनक से बताया कि सच्चा व्यक्ति है। ऐसे-ऐसे हुआ। सुबह राजा जनक जी ने ऋषि शुकदेव जी से पूछा कि आपसे मिलने स्त्री आई थी, आपने उसे अंगिकार न करके अच्छे संयम का प्रदर्शन किया है। आप #संयमी_व्यक्ति हैं। धन्य हैं आपके माता-पिता। #कबीर_परमेश्वर_जी_के_विचार_इनसे_भी_उच्च_तथा_श्रेष्ठ...

सन्तों की शिक्षा

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www.jagatgururampalji.org. सन्तों की शिक्षा #रंका_बंका_की_प्रेरणादायक_सत्यकथा  #परमेश्वर_कबीर_जी से #चम्पाकली ने पूछा कि हे भगवान! इस पाप की संपत्ति और रूपये का क्या करूं? परमेश्वर कबीर जी ने कहा कि बेटी! इस नरक के धन को दान कर दे। घर पर जाकर चम्पाकली ने विचार किया कि यदि सर्व धन दान कर दिया तो खाऊँगी क्या? कोई कार्य और है नहीं। चम्पाकली सत्संग अधिक समय जाने लगी। एक दिन #सत्संग में बताया गया कि:- रंका (Male) तथा बंका (Female) परमात्मा के #परम_भक्त थे। #तत्वज्ञान को ठीक से समझा था। उसी आधार से अपना जीवन यापन कर रहे थे। उनकी एक बेटी थी जिसका नाम अबंका था। एक दिन नामदेव भक्त ने अपने गुरू जी से कहा कि गुरूदेव आपके भक्त रंका व बंका बहुत निर्धन हैं। आप उन्हें कुछ धन दे दो तो उनको जंगल से लकडियाँ लाकर शहर में बेचकर निर्वाह न करना पड़े। दोनों जंगल में जाते हैं। लकड़ियाँ चुगकर लाते हैं। भोजन का काम कठिनता से चलता है। #गुरूदेव बोले, भाई! मैंने कई बार धन देने की कोशिश की है, परंतु ये सब दान कर देते हैं। दो-तीन बार तो मैं स्वयं वेश बदलकर लकड़ी खरीदने वाला बनकर गया हूँं...

संतों की शिक्षा

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                बेटी बोझ नहीं होती है       वह दिन था बड़ा ही खास….. जब मैं आयी थी अपने माता-पिता के घर बनकर उल्लास खुशी से अपनाया था दोनों ने अपनी बेटी को फिर क्यूँ था गम, मेरे जन्म पर इस समाज को क्यों इस समाज के आँखों में खटकी थी मैं आखिर क्यों इस समाज को बोझ सी लगी थी मैं जबकि मैं तो थी अपने माता-पिता के लिए खुशियों की बहार क्यों इस संसार ने बेटियों के जन्म पर सबको डराया है क्यों मेरे जन्म पर मेरी माँ को दोषी ठहराया है क्यों पहुँचा दिया गया मुझे और मेरी माँ के सपनो को शमशान क्यों न कर सके वो बेटे की जगह बेटी के जन्म पर अभिमान बेटे अगर होते हैं समाज की जान तो बेटियाँ भी होती हैं अपने कुल की शान वंश बढ़ाते हैं बेटे तो नाम रौशन करती हैं बेटियाँ माता-पिता के लिए तो बेटा हो या बेटी दोनों ही होते है उनके लिए उनकी आन, बान, शान फिर क्यों कि़या जाता है जन्म देने से इंकार बेटी को आखिर क्यों मार दिया जाता है गर्भ में हीं बेटी को क्यों न इस मानसिकता को बदलकर, इस कुरीति खत्म करें हम बेट...

Kabir is God

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Kabir is God www.jagatgururampalji.org लंका के राजा रावण ने तमगुण शिव की भक्ति की थी। उसने अपनी शक्ति से 33 करोड़ देवी देवताओं को कैद कर रखा था। फिर देवी सीता का अपहरण कर लिया। इसका क्या हश्र हुआ, आप सब जानते हैं। तमगुण शिव का उपासक रावण राक्षस कहलाया, सर्वनाश हुआ। निंदा का पात्र बना। अन्य उदाहरण भस्मासुर ने भगवान शिव (तमोगुण) की भक्ति की थी। वह बारह वर्षों तक शिव जी के द्वार के सामने ऊपर को पैर नीचे को सिर (शीर्षासन) करके भक्ति तपस्या करता रहा। एक दिन पार्वती जी ने कहा हे महादेव! आप तो समर्थ हैं। आपका भक्त क्या माँगता है? इसे प्रदान करो प्रभु। भगवान शिव ने भस्मागिरी से पूछा बोलो भक्त क्या माँगना चाहते हो। मैं तुझ पर अति प्रसन्न हूँ। भस्मागिरी ने कहा कि पहले वचनबद्ध हो जाओ, तब माँगूंगा। भगवान शिव वचनबद्ध हो गए। तब भस्मागिरी ने कहा कि आपके पास जो भस्मकण्डा(भस्मकड़ा) है, वह मुझे प्रदान करो। शिव ने वह भस्मकण्डा भस्मागिरी को दे दिया। कड़ा हाथ में आते ही भस्मागिरी ने कहा कि होजा शिवजी होशियार! तुम को भस्म करुँगा तथा पार्वती को पत्नी बनाउँगा। यह कहकर अभद्र ढ़ंग से हँसा तथा शिवजी ...