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जून, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

रानी इंदुमती की कथा

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  रानी इंदर मती की कथा  द्वापरयुग में चन्द्रविजय नाम का एक राजा था। उसकी पत्नी इन्द्रमति बहुत ही धार्मिक प्रवृति की औरत थी। संत-महात्माओं का बहुत आदर किया करती थी। उसने एक गुरुदेव भी बना रखा था। उनके गुरुदेव ने बताया था कि बेटी साधु-संतों की सेवा करनी चाहिए। संतों को भोजन खिलाने से बहुत लाभ होता है। एकादशी का व्रत, मन्त्रा के जाप आदि साधनायें जो गुरुदेव ने बताई थी। उस भगवत् भक्ति में रानी बहुत दृढ़ता से लगी हुई थी। गुरुदेव ने बताया था कि संतों को भोजन खिलाया करेगी तो तू आगे भी रानी बन जाएगी और तुझे स्वर्ग प्राप्ति होगी। रानी ने सोचा कि प्रतिदिन एक संत को भोजन अवश्य खिलाया करूँगी।  उसने यह प्रतिज्ञा मन में ठान ली कि मैं खाना बाद में खाया करूँगी, पहले संत को खिलाया करूँगी। इससे मुझे याद बनी रहेगी, कहीं मुझे भूल न पड़ जाये। रानी प्रतिदिन पहले एक संत को भोजन खिलाती फिर स्वयं खाती। वर्षों तक ये क्रम चलता रहा।  एक समय  हरिद्वार में कुम्भ के जितने भी त्रिगुण माया के उपासक संत थे सभी गंगा में स्नान के लिए (परभी लेने के लिए) प्रस्थान कर गये। इस कारण से ...

सच्चा रक्षक कौन

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          सच्चा   रक्षक  कौन ऋग्वेद मंडल 10 सूक्त 161 मंत्र 2 में प्रमाण है कि परमात्मा अपने भक्तों के संकट निवारण करता है।  यदि मृत्यु भी आ जाए तो भी उसको टालकर अपने भक्त को जीवित करके सौ वर्ष जीवन प्रदान कर देता है। सर्वशक्तिमान परमात्मा कबीर साहेब हैं  वेदों में प्रमाण है कि  परमात्मा  ही सब का रक्षक है अपने साधक के हर संकटों को एक क्षण में दूर कर सकता है। अधिक जानकारी के लिए देखिए साधना               टीवी शाम 7:30 बजे कबीर परमात्मा ही सर्व के मालिक हैं, चाहे हिन्दू हों, मुस्लिम हों, सिख हों या ईसाई। इसका प्रमाण सर्व सदग्रंथों में विद्यमान है सब का एक ही मालिक है कबीर परमात्मा। वही सतगुरु रूप में आकर तत्वज्ञान देते हैं। जिस समय सर्व सन्त जन शास्त्र विधि त्यागकर मनमानी पूजा द्वारा भक्त समाज को मार्ग दर्शन कर रहे होते हैं।  तब अपने तत्वज्ञान का संदेशवाहक बन कर स्वयं कबीर प्रभु ही आते हैं। अधिक जानकारी के लिए देखिए साधना टीवी शाम 7:30 बजे...

जन्माष्टमी

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कृष्ण जी ने एक मुट्ठी चावल के बदले सुदामा जी का महल बनवाया कबीर परमेश्वर  साहिब ने एक रोटी के बदले तैमूरलंग को सात पीढ़ी का राज दे दिया अधिक जानकारी के लिए देखें साधना टीवी शाम 7:30 बजे भगवान  कृष्ण  को देवकी  ने जन्म दिया  था, लेकिन उन्हें पाल-पोस कर बड़ा किया यशोदा  मा ने । माना जाता है कि  जन्म  देने वाले से पालने वाला बड़ा होता है। जबकि जबकि श्री कृष्ण जी मां की गोद से पैदा हुए और शिकारी के तीर से मृत्यु को प्राप्त हुए  जबकि वेदों में लिखा है कि भगवान मां के गर्भ से जन्म नहीं लेता अधिक जानकारी के लिए देखें साधना                  टीवी शाम 7:30 बजे

Bible

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                                                         Bible इसी का प्रमाण पवित्र बाईबल में तथा पवित्र र्कुआन शरीफ में भी है। र्कुआन शरीफ में पवित्र बाईबल का भी ज्ञान है, इसलिए इन दोनों पवित्र सद्ग्रन्थों ने मिल-जुल कर प्रमाण किया है कि कौन तथा कैसा है सृष्टी रचनहार तथा उसका वास्तविक नाम क्या है पवित्र बाइबल में भगवान का नाम कबीर है - अय्यूब 36:5। यहां स्पष्ट है की कबीर ही शक्तिशाली परमात्मा है।                        👇👇 पवित्र बाईबल (उत्पत्ति ग्रन्थ पृष्ठ नं. 2 पर, अ. 1ः20 - 2ः5 पर) छटवां दिन:- प्राणी और मनुष्य: अन्य प्राणियों की रचना करके 26. फिर परमेश्वर ने कहा, हम मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार अपनी समानता में बनाऐं, जो सर्व प्राणियों को काबू रखेगा। 27. तब परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार उत्पन्न किया, अपने ही स्वरूप के अनुसार परमेश्वर ने उसको ...

Gita sar

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                    गीता सार अध्याय 11 श्लोक 21 व 46 में अर्जुन कह रहा है कि भगवन् ! आप तो ऋषियों, देवताओं तथा सिद्धों को भी खा रहे हो, जो आप का ही गुणगान कर रहे हैं।  हे सहस्त्राबाहु अर्थात् हजार भुजा वाले भगवान ! आप अपने उसी चतुर्भुज रूप में आईये।  मैं आपके विकराल रूप को देखकर धीरज नहीं कर पा रहा हूँ

सच्चा ज्ञान कबीर परमात्मा का

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#KabirPrakatDiwasNotJayanti कबीर साहेब का प्रकट दिवस होता है,                        जयंती नहीं! सन् 1398 (विक्रमी संवत् 1455) ज्येष्ठ मास शुद्धि पूर्णमासी को ब्रह्ममूहूर्त में अपने सत्यलोक से सशरीर आकर परमेश्वर कबीर बालक रूप बनाकर लहरतारा तालाब में कमल के फूल पर विराजमान हुए। पूर्ण परमात्मा का माँ के गर्भ से जन्म नहीं होता। #1DayLeft_KabirPrakatDiwas चारों युगों में सिर्फ कबीर परमात्मा के प्रकट होने के ही प्रमाण हैं सतयुग में सत सुकृत नाम से, त्रेता में मुनीन्द्र नाम से,  द्वापर में करुणामय नाम से, और कलयुग में अपने असली नाम कबीर नाम से प्रकट होते हैं। बाकी सभी देव मां के गर्भ से जन्म लेते हैं।

कबीर प्रकट दिवस 5 जून 2020

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कबीर प्रकट दिवस 5 जून 2020 हर वर्ष ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा को कबीर प्रकट दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष 5 जून को इसे मनायेंगे। यही नहीं इस दिन कबीर साहेब की लीलाओं को भी याद किया जाता है। उनकी शिक्षाओं पर चलना आज मानवजाति के लिए बहुत आवश्यक है।  पूर्ण परमात्मा कबीर साहिब नै हीं दामोदर सेठ का जहाज बताया डूबता हुआ समुंदर में अद्भुत ज्ञान कबीर परमेश्वर ने ही सतलोक के विषय में बताया कि ऊपर एक ऐसा लोक है जहां सर्व सुख है। वहां कोई कष्ट नहीं है। जिसकी गवाही संत गरीबदास जी ने दी है।  अधिक जानकारी के लिए देखें साधना                  टीवी शाम 7:30 बजे