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संत रामपाल जी महाराज का उद्देश्य

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फ़िल्मों में दिखाई गई अश्लील हरकतें, छोटे अर्ध नग्न कपड़ों का पहनना, चोरी, हत्या, गुंडागर्दी, गालियां जिसका सीधा दुष्प्रभाव युवा वर्ग पर पड़ रहा है।  संत रामपाल जी महाराज जी का उद्देश्य है कि मानव समाज को इन सभी बुराईयों से दूर करके सत्य भक्ति पर लगाएं। संत रामपाल जी महाराज जी के लाखों अनुयायी बुराईयों को त्यागकर नेक जीवन जीने लगे हैं। संत रामपाल जी महाराज जी का उद्देश्य विश्व में प्रेम व शांति स्थापित करना व कुरीतियों, पाखंडवाद, नशा, दहेज प्रथा आदि को समाप्त करके सबको एक परमात्मा की भक्ति करवाकर सुखी बनाना और पूर्ण मोक्ष देना है। संत रामपाल जी महाराज जी का उद्देश्य है कि मानव समाज को इन सभी बुराईयों से दूर करके सत्य भक्ति पर लगाएं। हैं।

KabirPrakatDiwas 14June

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कबीर परमेश्वर, नानक जी को जिंदा बाबा के रूप में बेई नदी के किनारे मिले और उनके आग्रह करने पर सतलोक दिखाया तब श्री नानक जी ने उनकी महिमा का वर्णन करते हुए कहा, हक्का कबीर करीम तू, बेएब परवरदिगार। नानक बुगोयद जनु तुरा, तेरे चाकरां पाख़ाक।।

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अमर पुरुष कौन है ? जब 343 करोड़ त्रिलोकिय ब्रह्मा मर जाते हैं । 49 करोड़ त्रिलोकिय विष्णु भी मर जाते हैं और 7 करोड़ त्रिलोकिय शिव मर जाते हैं तब एक ज्योति निरंजन ( काल- ब्रह्म ) मरता है । परब्रह्म भी नष्ट होता है । यह काल भी हो जाएंगे । तब सर्व ब्रह्मण्डों का नाश केवल सतलोक व उससे ऊपर के लोक शेष रहेगें  स्वर्ग के राजा इंद्र का जीवनकाल 72 चतुर्युग (एक मन्वन्तर) का होता है। ब्रह्मा जी के 1 दिन में 14 इंद्र अपना जीवन काल पूरा करते है। अधिक जानकारी के लिए sant rampalji Youtube चैनल पर visit करें" www.jagatgururampalji.com
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कांवड़यात्रा  जैसे ही श्रावण महीने का आगमन हुआ, केसरिया रंग के कपड़े पहने शिवभक्तों के जत्थे कांवड़ यात्रा के लिए निकल पड़ते हैं। शिवजी को प्रसन्न करने के लिए कांवड़िये नंगे पांव सैंकड़ों किलोमीटर की पैदल यात्रा करते हैं और अपने कंधे पर कमंडल में गंगाजल भरकर, शिव मंदिर में शिवलिंग पर चढ़ाते हैं। 👇👇 शिव भक्त कहते हैं कि शिव जी ने भांग, धतूरे और गांजे का सेवन किया था और उसी को हम प्रसाद रूप में सेवन करते है। शिवभक्तों का यह भ्रम किसी भी पवित्र शास्त्र में लिखित नहीं है। भांग और गांजे के नशे में धुत कई कांवड़ियों की यात्रा के दौरान दुर्घटना में मौत हो जाती है। नीलकंठ यात्रा के दौरान अब तक कई मौतें भी हो चुकी हैं तो ऐसे हालात में यह समझना मुश्किल हो जाता है कि आखिर वह असली भगवान कहाँ है जो हर आपत्ति- विपत्ति में अपने भक्तों की रक्षा करता है? कांवड़यात्रा की सच्चाई किसी भी धर्म शास्त्र में कावड़ यात्रा के बारे में कहीं भी कोई प्रमाण नहीं है? फिर भी लोग कर रहे हैं? यथार्थ भक्ति विधि जानने के लिए अवश्य देखिए साधना चैनल पर प्रीति दिन रात्रि7:30 बजे जगतगुरु तत्वदर्शी संत ...

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नशा करना तेजी से क्यों फैलता है नशा ऐसी बीमारी है जो हमें हमारे समाज को हमारे देश को तेजी से निगलते जा रही है इस बुराई के कुछ हद तक जिम्मेदार हम लोग भी हैं हम अपने काम धंधों में इतना उलझ गए हैं कि हमें फुर्सत ही नहीं है ये जानने की कि हमारा बच्चा कहाँ जा रहा है । क्या कर रहा है कोई परवाह नहीं, बस बच्चों की मांगे पूरी करना ही अपनी जिम्मेदारी समझ बैठे हैं । क्यों करते हैं लोग नशा शौक के नाम पर तो कभी दोस्ती की आड़ में , कभी दुनियाँ के दुखों का बहाना करके तो कभी कोई मज़बूरी बताकर, कभी टेंशन को दूर करनेके लिए लोग शराब , सिगरेट, तम्बाकू आदि अनेक प्रकार के मादक द्रव्यों का सेवन करते हैं लेकिन नशा कब उनकी जिंदगी का हिस्सा बन जाता है उन्हें पता ही नहीं चलता जब पता चलता है नशे से नुकसान बलात्कार, चोरी, आत्महत्या आदि अनेक अपराधों के पीछे नशा एक बहुत बड़ी वजह है । शराब पीकर गाड़ी चलाते हुए एक्सीडेंट शादी शुदा व्यक्तियों द्वारा नशे में अपनी पत्नी से मारपीट करना आम बात है। मुँह , गले व फेफड़ों का कैंसर ब्लड प्रैशर प्रकार का नशा है । उपचार नशा छोड़ने क...

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नाग पूजा कितनी लाभदायक है Nag Panchami 2019: श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि यानी इस वर्ष 5 अगस्त को नाग देवता की पूजा की जाएगी। देशभर में आज नाग पंचमी मनाई जा रही है। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नागों की पूजा के संदर्भ में एक कथा हैं, जिसमें नागों की पूजा के कारण का उल्लेख मिलता है। वेद और पुराणों में नागों का उद्गम महर्षि कश्यप और उनकी पत्नी कद्रू से माना जाता है। नागों का मूल स्थान पाताल लोक है। देवों की सेवा में समर्पित हैं नाग पुराणों में यक्ष, किन्नर और गन्धर्वों के वर्णन के साथ-साथ नागों का भी वर्णन मिलता है। भगवान विष्णु की शय्या की शोभा नागराज शेष बढ़ाते हैं। भगवान शिव के अलंकरण में वासुकी की महत्वपूर्ण भूमिका है। योगसिद्धि के लिए जो कुण्डलिनी शक्ति जागृत की जाती है, उसको सर्पिणी कहा जाता है। पुराणों में भगवान सूर्य के रथ में द्वादश नागों का उल्लेख मिलता है, जो क्रमश: प्रत्येक मास में उनके रथ के वाहक बनते हैं। इस प्रकार अन्य देवताओं ने भी नागों को धारण किया है। एक बार राजा परिक्षित को सातवें दिन सर्प ने डसना था। उस समय सर्व ऋषियों ने यह...

रानी इंदुमती की कथा

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  रानी इंदर मती की कथा  द्वापरयुग में चन्द्रविजय नाम का एक राजा था। उसकी पत्नी इन्द्रमति बहुत ही धार्मिक प्रवृति की औरत थी। संत-महात्माओं का बहुत आदर किया करती थी। उसने एक गुरुदेव भी बना रखा था। उनके गुरुदेव ने बताया था कि बेटी साधु-संतों की सेवा करनी चाहिए। संतों को भोजन खिलाने से बहुत लाभ होता है। एकादशी का व्रत, मन्त्रा के जाप आदि साधनायें जो गुरुदेव ने बताई थी। उस भगवत् भक्ति में रानी बहुत दृढ़ता से लगी हुई थी। गुरुदेव ने बताया था कि संतों को भोजन खिलाया करेगी तो तू आगे भी रानी बन जाएगी और तुझे स्वर्ग प्राप्ति होगी। रानी ने सोचा कि प्रतिदिन एक संत को भोजन अवश्य खिलाया करूँगी।  उसने यह प्रतिज्ञा मन में ठान ली कि मैं खाना बाद में खाया करूँगी, पहले संत को खिलाया करूँगी। इससे मुझे याद बनी रहेगी, कहीं मुझे भूल न पड़ जाये। रानी प्रतिदिन पहले एक संत को भोजन खिलाती फिर स्वयं खाती। वर्षों तक ये क्रम चलता रहा।  एक समय  हरिद्वार में कुम्भ के जितने भी त्रिगुण माया के उपासक संत थे सभी गंगा में स्नान के लिए (परभी लेने के लिए) प्रस्थान कर गये। इस कारण से ...