कांवड़यात्रा 


जैसे ही श्रावण महीने का आगमन हुआ, केसरिया रंग के कपड़े पहने शिवभक्तों के जत्थे कांवड़ यात्रा के लिए निकल पड़ते हैं। शिवजी को प्रसन्न करने के लिए कांवड़िये नंगे पांव सैंकड़ों किलोमीटर की पैदल यात्रा करते हैं और अपने कंधे पर कमंडल में गंगाजल भरकर, शिव मंदिर में शिवलिंग पर चढ़ाते हैं।


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शिव भक्त कहते हैं कि शिव जी ने भांग, धतूरे और गांजे का सेवन किया था और उसी को हम प्रसाद रूप में सेवन करते है। शिवभक्तों का यह भ्रम किसी भी पवित्र शास्त्र में लिखित नहीं है। भांग और गांजे के नशे में धुत कई कांवड़ियों की यात्रा के दौरान दुर्घटना में मौत हो जाती है। नीलकंठ यात्रा के दौरान अब तक कई मौतें भी हो चुकी हैं तो ऐसे हालात में यह समझना मुश्किल हो जाता है कि आखिर वह असली भगवान कहाँ है जो हर आपत्ति- विपत्ति में अपने भक्तों की रक्षा करता है?


कांवड़यात्रा की सच्चाई
किसी भी धर्म शास्त्र में कावड़ यात्रा के बारे में कहीं भी कोई प्रमाण नहीं है?
फिर भी लोग कर रहे हैं?
यथार्थ भक्ति विधि जानने के लिए अवश्य देखिए साधना चैनल पर प्रीति दिन रात्रि7:30 बजे जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के सत्संग
श्रीमद भगवद गीता जी के अध्याय 17 श्लोक 23 में प्रमाण है कि परमात्मा को पाने का तीन मंत्रों (ओम तत् सत्) जाप है और इन मंत्रों से ही पूर्ण मोक्ष संभव है और वो भी पूर्ण अधिकारी संत से प्राप्त सही विधि की जाए, फिर वह तत्वदर्शी संत आपको इन सांकेतिक मंत्रों को खोलकर बताएगा।

अवश्य जानें कावड़ यात्रा का सच !
आखिर कावड़ यात्रा से कोई पुण्य है भी कि नहीं?

या कावड़ यात्रा शास्त्रविरुद्ध है? यह जानने के लिए अवश्य देखें संत रामपाल जी महाराज का सत्संग ईश्वर चैनल शाम 8:30 से

अधिक जानकारी के लिए देखें साधना टीवी शाम 7:30 बजे
 और
www.jagatgururampalji.org

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