God is kabir
सर्व सृष्टि रचनहार कबीर परमात्मा
आदरणीय गरीब दास जी को कबीर परमात्मा मिले थे, उन्होंने अपनी वाणीयों में अनेकों प्रमाण दिए हैं कि कबीर जी ही पूर्ण परमात्मा हैं, जिसने सर्व सृष्टि की रचना की
"गरीब, जल थल पृथ्वी गगन में बाहर भीतर एक। पूर्ण ब्रह्म कबीर है, अविगत पुरुष अलेख।"
अधिक जानकारी के लिए देखें साधना टीवी शाम 7:30 बजे
गरीब, बारद ढुरि कबीर कै
भक्ति हेत के काज।
जब कबीर जी काशी में लहरतारा तालाब में कमल के फूल पर शिशु रूप में प्रकट होकर लीला करने आए हुए थे। उसी समय एक रामानन्द जी पंडित थे जो प्रसिद्ध आचार्य माने जाते थे। उनको कबीर परमेश्वर जी ने अपने सत्यलोक के दर्शन कराए, अपना परिचय कराया। फिर वापिस शरीर में लाकर छोड़ा। उसके पश्चात् स्वामी रामानन्द जी ने कहा
स्वामी रामानन्द जी ने कहा है कि हे कबीर जी! आप ऊपर सतलोक में भी हैं, आप यहाँ हमारे पास भी विद्यमान हैं। आप दोनों स्थानों पर लीला कर रहे हैं। वास्तव में आप ही साहब यानि परमात्मा हैं। वास्तव में आप ही पूर्ण संत के गुणों से युक्त हैं और वास्तव में सतगुरू भी आप ही हैं तथा एक वास्तविक हंस यानि जैसा भक्त होना चाहिए, वे लक्षण भी आप में ही हैं।
जीने की राह
इस पुस्तक में पूर्ण परमात्मा कौन है उसका नाम क्या है उसकी भक्ति कैसी है सब जानकारी मिलेगी मानव जीवन सफल हो जायेगा परिवार में किसी प्रकार की बुराई नहीं रहेगी परमात्मा की कृपा सदा बनी रहेगी जीने की राह उत्तम मिलने से यात्रा आसान हो जाएगी जो इस पुस्तक को घर में नहीं रखेगा वह जीवन की राह उत्तम ना मिलने से संसार रूपी वन में भटक कर अनमोल जीवन नष्ट करेगा परमात्मा के घर में जाकरपश्चाताप के अतिरिक्त कुछ हाथ नहीं लगेगा उस समय आपको पता चलेगा कि जीने की राह उत्तम ने मिलने से जिंदगी बर्बाद हो गई फिर आप परमात्मा से विनय करेंगे कि हे प्रभु एक मानव जीवन और वर्क्स वर्क्स दो मैं सच्चे मन से सत्यवती करूंगा जीवन की सच्ची राह की खोज करने सत्संग में जाया करूंगा आजीवन भक्ति करूंगा अपना कल्याण करवाएगा उस समय परमात्मा के दरबार याने कार्यालय में आपके पूर्व के जन्मों की फिल्म चलाई जाएगी जिनमें प्रत्येक बार बार जब मानव जीवन प्राप्त हुआ था आपने यही कहा था कि एक मानव जीवन और दे दो कभी बुराई नहीं करूंगा आजीवन भक्ति भी करूंगा घर का कार्य निर्वाह के लिए भी कर लूंगा पूर्ण सतगुरु से दीक्षा लेकर कल्याण करवा लूंगा जो गलती अब के मानव जीवन में हुई है कभी नहीं दूंगा या
दुनिया की नंबर एक बुक,, #जीने_की_राह !
आप भी घर बैठे मंगाए बिल्कुल निशुल्क,
भेजे अपना नाम पता इस नंबर पर 7496801825
https://youtu.be/2QE1EvXXsM0
रामेश्वर कबीर जी ने अपने मन को संबोधित करके हम प्राणियों को सतर्की किया है कि इस संसार में 2 दिन का यानी थोड़े समय का मेहमान है इस थोड़े से मानव जीवन में आतम ज्ञान अबाउट से अनेकों पाप इकट्ठे करके अनमोल मानव जीवन नष्ट कर जाता है धन कमाने की विधि तो संसार के व्यक्ति बता सकते हैं परंतु गुरुदेव जी के बिना आत्मज्ञान यानी जीव कहां से आया मनुष्य जीव का मूल उद्देश्य क्या है सतगुरु धारण किए बिना यानी दीक्षा लिए बिना जीव का मानव जन्म नष्ट हो जाता है यह बात गुरुजी के बिना कोई नहीं बताएगा चाहे पृथ्वी का राज भी बन जा परंतु भविष्य में पशु जन्म मिलेगा जन्म मरण का चक्र गुरु जी के ज्ञान में दीक्षा मंत्र नाम बिना समाप्त नहीं हो सकता है जब तक जन्म मरण का चक्र समाप्त नहीं होता तो बताया है कि यह जीवन हर हट का कुवा लोई या गर्ल बन गया है सब कोई खेड़ी कुंजर और अवतारा राठौर बंदे कोई भारा
तत्वदर्शी संत गुरु ने मिलने के कारण जो साधना साधक करते करते हैं वह सर्वविदित या कर मन माना आचरण होता है जिससे कोई लाभ साधक को नहीं होता है गीता अध्याय 16 श्लोक 23 24 में प्रमाण है कि भारत जो साधक शास्त्र विधि को त्याग कर मन माना आचरण करता है उसको ने तो सुख होता है ने सिद्धि प्राप्त होती है और ना ही उसकी गति अर्थ अर्थ मोक्ष होता है इससे तेरे लिए सांस रही प्रमाण है की कौन सी साधना करनी चाहिए और कौन सी नहीं करनी चाहिए
भक्ति हेत के काज।
जब कबीर जी काशी में लहरतारा तालाब में कमल के फूल पर शिशु रूप में प्रकट होकर लीला करने आए हुए थे। उसी समय एक रामानन्द जी पंडित थे जो प्रसिद्ध आचार्य माने जाते थे। उनको कबीर परमेश्वर जी ने अपने सत्यलोक के दर्शन कराए, अपना परिचय कराया। फिर वापिस शरीर में लाकर छोड़ा। उसके पश्चात् स्वामी रामानन्द जी ने कहा
स्वामी रामानन्द जी ने कहा है कि हे कबीर जी! आप ऊपर सतलोक में भी हैं, आप यहाँ हमारे पास भी विद्यमान हैं। आप दोनों स्थानों पर लीला कर रहे हैं। वास्तव में आप ही साहब यानि परमात्मा हैं। वास्तव में आप ही पूर्ण संत के गुणों से युक्त हैं और वास्तव में सतगुरू भी आप ही हैं तथा एक वास्तविक हंस यानि जैसा भक्त होना चाहिए, वे लक्षण भी आप में ही हैं।
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तत्वदर्शी संत गुरु ने मिलने के कारण जो साधना साधक करते करते हैं वह सर्वविदित या कर मन माना आचरण होता है जिससे कोई लाभ साधक को नहीं होता है गीता अध्याय 16 श्लोक 23 24 में प्रमाण है कि भारत जो साधक शास्त्र विधि को त्याग कर मन माना आचरण करता है उसको ने तो सुख होता है ने सिद्धि प्राप्त होती है और ना ही उसकी गति अर्थ अर्थ मोक्ष होता है इससे तेरे लिए सांस रही प्रमाण है की कौन सी साधना करनी चाहिए और कौन सी नहीं करनी चाहिए
उजड़े हुए परिवारों को जीने की राह दिखाने वाला संत हरियाणा के एक छोटे से गांव में धनाना में जन्म ले चुका है जिसका नाम संत रामपाल जी है
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